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पीएनबी ने ‘प्रथम सतत वित्त नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026’में वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को एक मंच दिया
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: भारत के अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक, पंजाब नेशनल बैंक ने द्वारका, नई दिल्ली स्थित अपने कॉर्पोरेट कार्यालय में तीसरे पीसीएएफ इंडिया एक्सेलरेटर सत्र के साथ प्रथम सतत वित्त नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी की। इस शिखर सम्मेलन में नियामक निकायों, बैंकों, विकास वित्त संस्थानों, कॉर्पोरेट्स और सतत विकास संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, ताकि भारत को एक सतत और जुझारू अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने में वित्त की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार-विमर्श किया जा सके।
यह शिखर सम्मेलन पीएनबी की सतत विकास और स्थिरता की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इसने ज्ञान के आदान-प्रदान, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और सतत वित्त के व्यावहारिक दृष्टिकोण तलाशने के लिए एक सहयोगी मंच प्रदान किया। सम्मेलन में मुख्य रूप से जलवायु जोखिम, जिम्मेदार बैंकिंग, वित्तपोषित उत्सर्जन, प्रकृति से जुड़े जोखिमों और वित्तीय निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्थिरता के पहलुओं को शामिल करने पर चर्चा की गई।
इस कार्यक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम वित्तीय पहल, पार्टनरशिप फॉर कार्बन अकाउंटिंग फाइनेंशियल, सिडबी, नैबफिड, एक्ज़िम बैंक, आईएफसीआई, आईआईएफसीएल, सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बैंकों, कॉर्पोरेट्स और वित्तीय एवं सतत विकास पारिस्थितिकी तंत्र के अन्य प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की भागीदारी देखी गई।
उद्घाटन सत्र को पीएनबी की मुख्य समूह जोखिम अधिकारी सुश्री मौसमी मजूमदार ने संबोधित किया, जिन्होंने पीएनबी की सतत विकास यात्रा और भविष्य की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कंट्री हेड-भारत डॉ. बालकृष्ण पिसुपति ने सतत वित्त पर अपने विचार साझा किए, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक के उप महाप्रबंधक और प्रमुख (सतत वित्त समूह) श्री साकेत कुमार ने “जलवायु जोखिम और सतत वित्त – नियामक दृष्टिकोण” पर एक विशेष व्याख्यान दिया।
इस शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण “भारत में सतत वित्त के लिए आगे की राह क्या है?” विषय पर आयोजित एक नेतृत्व पैनल चर्चा थी। इस पैनल में बैंकिंग, विकास वित्त, उद्योग, नवीकरणीय ऊर्जा और स्थिरता के विभिन्न दृष्टिकोणों को एक साथ लाया गया। चर्चा में सतत वित्त को बड़े पैमाने पर ले जाने के अवसरों और चुनौतियों, भारत के बदलाव का समर्थन करने में वित्तीय संस्थानों की भूमिका को सुदृढ़ करने और हितधारकों के बीच अधिक सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
शिखर सम्मेलन में यूएनईपी एफआई, क्रेडिट एग्रीकोल कॉर्पोरेट एंड इन्वेस्टमेंट बैंक, गोलोम्ट बैंक, क्लाइमेट रिस्क होराइजन, स्टेप चेंज और ईवाई के विशेषज्ञों के नेतृत्व में ज्ञान सत्र भी आयोजित किए गए। इन सत्रों में उभरती प्राथमिकताओं के एक विस्तृत स्पेक्ट्रम को कवर किया गया, जिसमें जिम्मेदार बैंकिंग के सिद्धांत, प्रकृति से जुड़े जोखिम, भारत का सतत वित्त परिदृश्य, वित्तपोषित उत्सर्जन और भारत की अर्थव्यवस्था को एक सतत अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए वित्तपोषण शामिल हैं।
तृतीय पीसीएएफ इंडिया एक्सेलेरेटर सत्र इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण घटक था, जिसका उद्देश्य वित्तीय संस्थानों की अपनी वित्तपोषण गतिविधियों से जुड़े उत्सर्जन को मापने और प्रकट करने की तकनीकी और संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करना था। इस सत्र में पीसीएएफ की वैश्विक यात्रा और भारत में इसके विस्तार के प्रयासों, तकनीकी तौर-तरीकों, व्यावहारिक उदाहरणों और प्रतिभागियों को वित्तपोषित उत्सर्जन लेखांकन तथा भारतीय वित्तीय संदर्भ में इसके अनुप्रयोग की समझ बढ़ाने के लिए एक समावेशी कार्यशाला को शामिल किया गया।
सतत विकास की प्रतिबद्धताओं को मापने योग्य कार्रवाई में बदलने के महत्व को इंगित करते हुए, इस आयोजन में इसके कार्बन पदचिह्न का मूल्यांकन भी शामिल था, जो जिम्मेदार सतत विकास प्रथाओं को आगे बढ़ाने में उत्सर्जन माप और जवाबदेही की भूमिका को रेखांकित करता है।
शिखर सम्मेलन का समापन पीएनबी के महाप्रबंधक श्री प्रताप केशरी मल्लिक के संबोधन के साथ हुआ।
सतत वित्त नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026 और ‘पीसीएएफ इंडिया एक्सेलरेटर सत्र’ के माध्यम से, पीएनबी ने उद्योग सहयोग, ज्ञान साझाकरण और संस्थागत क्षमता निर्माण के माध्यम से सतत वित्त को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। यह पहल भारत में अधिक जिम्मेदार, जलवायु-अनुकूल और सतत वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान करने के बैंक के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।


